श्री माँ काली कि बाल स्वरूप मनमोहक सुन्दर प्रतिमा, जो अनायास ही सबका ध्यान अपनीओर आकर्षित कर लेती है, उनकी प्रेरणा से एवं गुरु के आशीर्वाद से माह जून 1997 में तिफरा यदुनंदन नगर बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ ) के श्मशानघाट में , ५ फिट चोरस चबूतरे पर स्थापित कि गई है | प्रथम दिवस से ही दो उल्लू उनके समीप पुरे समय बैठते थे | मंदिर के लघु रूप धारण करने के बावजूद वे लगभग ६ माह मौजूद रहे | प्रथम यज्ञ के उपरांत उनका हमेशा के लिए प्रस्थान हो गया | प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा में होने के अलावा लगभग ४० फिट के अंतराल से ठीक सामने शव दाह संस्कार स्थल है | जहां आज भी शव दाह संस्कार कार्य किया जाता है | तीन यज्ञ कुंड बनाये गए है जिसमे समय समय पर अमावस्या कि रात्रि यज्ञ किये जाते है |